Tuesday, January 31, 2023
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बेंगलुरु हिंसा संयोग या प्रयोग

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(Front News Today/रूद्र प्रकाश) हाल ही में कर्नाटक के राजधानी बेंगलुरु में हिंसा हुई। जिसमें 3 लोग मारे गए हैं और सैकड़ों की संख्या में लोग घायल हुए हैं और कई पुलिसकर्मी को भी चोट आई है। करीब 300 गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया। यह लोग रास्ते में जो भी आया उसको आग के हवाले करते चले गए। यह घटना एक फेसबुक पोस्ट को लेकर हुई थी कांग्रेस के एक नेता के भतीजे ने अपने फेसबुक अकाउंट पर कुछ आपत्ति जनक पोस्ट किया था जिसके चलते ये हिंसक घटना हुई और एक ही साथ हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर गए। पहले वे विधायक घर पर हमला किया और उनके घर को तहस-नहस कर दिया संजोग से विधायक के परिवार के लोग कृष्ण जन्म जन्माष्टमी मनाने मंदिर चले गए थे और बाल-बाल बच गए। उसके बाद यह भीड़ पास के पुलिस थाने पर चली गई वहां पर उसने विधायक के भतीजे को गिरफ्तार करने की मांग करने लगे। पुलिस थानों पर हजारों की संख्या में लोग इकट्ठे हो गए और पुलिस पर पत्थर बरसाने लगे जिसमें कई पुलिसवाले घायल हो गए हैं और यह लोग अल्लाह हू अकबर व कुर्बानी देनी होगी कि नारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे। करीब 300 गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया जिसमें एक डीएसपी की गाड़ी भी शामिल है जरा सोचिए यह लोग अगर आम जनता के बीच चले जाते तो क्या हाल होता और कितना नुकसान होता कितनी जानें चली गई होती। बेंगलुरु को सिलिकॉन वैली कहा जाता है और पढ़े लिखो का शहर कहा जाता है यहां इस तरह की घटना चिंताजनक बात है यहां पी एफ आई का नाम सामने आया है जिसका एक राजनीतिक पार्टी एसबीपी आई है। इसका एक स्थानीय नेता मुघबिल बिल कमाल पाशा को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन पीएफआई का नाम दिल्ली दंगों में भी आया था यह देख कर दिल्ली दंगों की याद आ जाता है। इस दंगों की तरह यह दंगा भी एक सुनियोजित तरीके से किया गया दिल्ली दंगे में जिस तरह सीए एनआरसी को मुद्दा बनाया गया फिर उसके बाद रोड को ब्लॉक किया गया उसके बाद से दंगा भड़क गई। ठीक उसी तरह बेंगलुरु दंगा में फेसबुक अकाउंट में मजहबी पोस्ट को आधार बनाया गया है। दिल्ली दंगों के कुछ महीने बाद ही बेंगलुरु दंगा हुआ। शहर में जगह नहीं है लेकिन दंगा वही है। जरा सोचिए एक साथ इतनी भीड़ कैसे इकट्ठे हो सकती है इसके लिए सुनियोजित तरीके से लोगों को इकट्ठा किया जाता है और ग्रुप में लोगों को बांट दिया जाता है और लोगों काम अलग अलग दे दिया जाता है। यह भीड़ अल्लाह हू अकबर करते हुए कुर्बानी देनी होगी कि नारे लगाते हुए जहां जो मन में आया था करते हुए शहर को जला डाला।
हमारे देश में हिंदू देवी देवताओं का बहुत मजाक उड़ाया जाता है फिल्मों में कॉमेडियन कि ओर से सोशल मीडिया पर तरह तरह के कमेंट किया जाता है देखते देखते कितने दंगे हो जाती है लेकिन यह लोग फेसबुक पर एक कमेंट किया और शहर को जला डाला। जरा सोचिए लोग अगर आम जनता के बीच पहुंच जाते थे कितने नुकसान होती इसका अनुमान नहीं लगाया जा सकता है। हाल ही में महाराष्ट्र के पालघर में दो साधुओं की हत्या हुई कितने जगह पर दंगे फैल गए। हालांकि कर्नाटक सरकार ने यूपी सरकार की तरह दंगाइयों से हर्जाना वसूलने का फरमान जारी कर दिया और यही दंगे दूसरे मजहब के लोग करते तो कुछ लोगों को देश खतरे में नजर आने लगता और इस दंगे पर भी चुप बैठे हैं। हालांकि कांग्रेस पार्टी को अभी तक उस कमेंट का इंतजार है। जो सरकार इस दंगे पर देगी। लेकिन यह लोग वोट बैंक के चलते अभी तक कुछ ज्यादा नहीं बोल पाये है। पुलिस को इस दंगे को गहनता से जांच करनी चाहिए और हमारी इंटेलिजेंस भी इसमें नाकाम दिखती हैं तथा इस दंगों को पहले से ही सूचना नहीं दे पाई खैर जो भी हो दोषियों को कड़ी सजा होनी चाहिए। कोई भी मजहब हो उस पर कोई आपत्तिजनक कमेंट नहीं होनी चाहिए हम इसके खिलाफ हैं तथा सरकार को सोशल मीडिया पर निगरानी करनी चाहिए। और इस पर एक प्रॉपर कानून बनने चाहिए

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