2025 को अलविदा: एक साल की यादें, नई उम्मीदों का आगमन

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फ़रीदाबाद।(ANURAG SHARMA) समय की धारा में एक और साल लौट रहा है अपनी मंजिल की ओर। 2025, जो चुनौतियों और उपलब्धियों का अनोखा संगम लेकर आया था, आज विदाई के क्षणों में खड़ा है। संपादक की कलम से इस साल को निहारें तो यह एक ऐसी किताब की तरह लगता है, जिसमें हर पन्ना जीवन के रंगों से रंगा हुआ है।भारत ने इस साल आर्थिक विकास की नई ऊंचाइयां छुईं। जीडीपी ग्रोथ 7 प्रतिशत से ऊपर रही, स्टार्टअप्स ने दुनिया को चौंकाया और हरित ऊर्जा में आत्मनिर्भरता की दिशा मजबूत हुई। हरियाणा जैसे राज्यों में कृषि क्रांति और डिजिटल इंडिया की लहर ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पंख दिए। वहीं, सामाजिक मोर्चे पर महिला सशक्तिकरण और शिक्षा सुधारों ने लाखों जिंदगियों को नई दिशा दी।मगर चुनौतियां भी कम न रहीं। जलवायु परिवर्तन ने बाढ़ और सूखे के रूप में चेतावनी दी, जबकि महंगाई और बेरोजगारी ने युवाओं की नींद हराम की। NCR क्षेत्र में ट्रैफिक जाम और प्रदूषण ने शहरों को सांस लेने पर मजबूर किया, लेकिन जन जागरूकता ने इन्हें संभालने की कोशिश की।अब 2026 की दहलीज पर खड़े होकर हम कह सकते हैं—2025 ने हमें सिखाया कि संघर्ष ही सफलता का आधार है। नई सरकारें, नई नीतियां और तकनीकी क्रांति के साथ नया साल नई आशाओं का वाहक बने। विदाई के इस पल में शुभकामनाएं—साल बीत गया, लेकिन यादें अमर रहेंगी!

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