“जिस फोन और लैपटॉप के लिए हम बच्चों को रोकते थे. अब वो खुद बच्चों को देने पड़ते हैं – ऑनलाइन क्लास

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(Front News Today) बच्चों की ऑनलाइन क्लासेज़ होने से मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल बढ़ गया है और बच्चे स्क्रीन पर ज़्यादा वक़्त बिताने लगे हैं. इसका असर उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है.

ऑनलाइन क्लास शुरू होने के बाद बच्चों को सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक लैपटॉप के सामने ही बैठना पड़ता है ,इससे बच्चों को कंधे, पीठ और आंखों में दर्द होने लगा है.
“जिस फोन और लैपटॉप के लिए हम बच्चों को रोकते थे. अब वो खुद बच्चों को देने पड़ते हैं

मानव विकास संसाधन मंत्रालय ने बच्चों पर डिज़िटल पढ़ाई के शारीरिक और मानसिक प्रभावों को देखते हुए “प्रज्ञाता” नाम से डिजिटल शिक्षा संबंधी दिशानिर्देश ज़ारी किए हैं.
इसमें ऑनलाइन क्लासेज़ की संख्या और समय को सीमित करने के लिए सुझाव दिए गए हैं.

प्री प्राइमेरी- माता-पिता से बातचीत और उनके मार्गदर्शन के लिए 30 मिनट का सेशन.

पहली से आठवीं – हर रोज़ 30 से 45 मिनट की दो क्लासेज़.

नौंवी से बारहवीं – हर रोज़ 30 से 45 मिनट की चार क्लासेज़.

इसमें बच्चों के लिए फिज़िकल एक्टिविटी और इंटरनेट के इस्तेमाल से जुड़ी सलाह भी दी गई है. साथ ही माता-पिता के लिए इन नई स्थितियों में सामंजस्य बैठाने के तरीक़े भी सुझाए गए हैं.
इसमें समय-समय पर ब्रेक लेने, ऑफलाइन खेल खेलने और माता-पिता की निगरानी में क्लास लेने की सलाह दी गई है.

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