मीडिया विभाग की इंटर्नशिप के अंतर्गत ‘वॉइस ओवर’ पर कार्यशाला का आयोजन

Date:

वॉइस ओवर एक कला, सीखना एक सतत प्रक्रिया है : भूपेंद्र

आइडिया के दम पर ही मीडिया विद्यार्थी अपनी पहचान बना सकते हैं: प्रो.पवन सिंह

फरीदाबाद : 31 दिसंबर। जे.सी.बोस विश्वविद्यालय के संचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा शीतकालीन इंटर्नशिप के अंतर्गत ‘वॉइस ओवर’ पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें विशेषज्ञ भूपेंद्र ने विद्यार्थियों को आवाज विशेषज्ञ और पीआर एवं विज्ञापन की बारीकियां सिखाई। विभाग के संचार क्लब एवं दृश्य क्लब की शीतकालीन इंटर्नशिप में मीडिया और विज़ुअल कम्युनिकेशन के 40 विद्यार्थी भाग ले रहे हैं। कार्यशाला में विद्यार्थियों ने आवाज के आवश्यक तत्व में फॉर ‘पी’ जैसे – पिच, पोज़, पेस, बेस के महत्व को दर्शाते हुए इनकी तमाम बारीकियां सीखी और उनका अभ्यास किया।

मीडिया विभाग स्टूडियो में चल रही इंटर्नशिप में बुधवार को ‘वॉइस ओवर’ पर आयोजित कार्यशाला में विभागाध्यक्ष प्रो.पवन सिंह ने पीआर एवं विज्ञापन विशेषज्ञ भूपेंद्र को सैपलिंग भेंट कर उनका स्वागत किया। प्रो.पवन सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि इस कार्यशाला में विद्यार्थी वॉइस ओवर की विधा से परिचित होंगे और आवाज विशेषज्ञ के साथ साथ पीआर एवं विज्ञापन की बारीकियां जानेंगे। उन्होंने कहा कि एक आइडिया के दम फाई मीडिया विद्यार्थी अपनी एक अलग पहचान बना सकते हैं।

पीआर एवं विज्ञापन विशेषज्ञ भूपेंद्र ने विद्यार्थियों के साथ सहज स्वभाव से संवाद स्थापित करते हुए ‘आवाज’ की विशेषताओं के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि ‘वॉइस ओवर’ एक कला है जिसमें फॉर ‘पी’ जैसे – पिच, पोज़, पेस, बेस का विशेष महत्व होता है। आवाज विशेषज्ञ बनने के लिए इन्ही चारों विधाओं में पारंगत होना एक अच्छे ‘वॉइस ओवर’ आर्टिस्ट की पहचान होती है। उन्होंने पीआर एवं विज्ञापन में कंटेंट और विज़ुअल दोनों के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि लेखन और उच्चारण में स्पष्टता, सहजता, सरलता, वार्तालाप एवं आम जनमानस से भावनात्मक जुड़ाव रखने वाला होना चाहिए। उन्होंने विज्ञापन क्षेत्र में आने वाले बदलाव वाली चुनौती के लिए तैयार रहने के लिए भी चेताया। उन्होंने उदहारण देकर कुछ अच्छे, बुरे, औसतन और सर्वाधिक लोकप्रिय विज्ञापनों को भी परिभाषित किया। विज्ञापन के लिए नये-नये आइडिया पर कार्य करते हुए विज्ञापन निर्माण के लिए हुक लाइन, ट्रेंडिंग, टारगेट ऑडियंस को ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने बताया कि जो विज्ञापन नहीं चला उसका विश्लेषण अवश्य करें। विज्ञापनों को ध्यान से जरूर देखें। सबसे पहले अपनी स्वयं की आवाज में विज्ञापन रिकॉर्ड करें। फिर उसका विश्लेषण करें।

अंत में कार्यशाला कोऑर्डिनेटर अजय ने सभी का धन्यवाद व्यक्त किया। इस अवसर पर सहायक प्रोफेसर डॉ. सोनिया हुड्डा, प्रोडक्शन सहायक पंकज सैनी, विशाल मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_img

Popular

More like this
Related

मिलावटी मिठाइयों से बढ़ रही पेट की गंभीर समस्याएं : डॉ आरसी सोनी

त्योहारी मौसम और खास मौकों पर मिठाइयों की खपत...

एकॉर्ड अस्पताल में 7000 सफल हार्ट प्रोसीजर परकेक काटकर मनाई खुशियां

एकॉर्ड अस्पताल में 7000 सफल हार्ट प्रोसीजर परकेक काटकर...