आरएसएस शताब्दी वर्ष के अंतर्गत प्रबुद्ध नागरिक संगोष्ठी का आयोजन, ‘पंच परिवर्तन’ से सामाजिक जागरण का आह्वान

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– 100 वर्षों की यात्रा राष्ट्र सेवा को समर्पित: आलोक कुमार

‘पंच परिवर्तन’ बनेगा सामाजिक परिवर्तन का आधार: सतीश

फरीदाबाद। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आज फरीदाबाद महानगर (पूर्व) द्वारा अधिवक्ता एवं न्यायिक जगत के लिए एक विशेष ‘प्रबुद्ध नागरिक संगोष्ठी’ का आयोजन किया गया। सेक्टर-12 स्थित जिला बार न्यायिक परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में भारी संख्या में अधिवक्ताओं और शहर के गणमान्य नागरिकों ने हिस्सा लिया।

संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य राष्ट्र सेवा में आरएसएस की 100 वर्षों की यात्रा पर चर्चा करना और ‘पंच परिवर्तन’ के माध्यम से समाज में नई चेतना जागृत करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने संघ की 1925 से 2025 तक की विकास यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ‘आरएसएस’ की 100 वर्षों की यात्रा समाज के सहयोग और समर्पण की प्रेरणादायक कहानी है। संघ ने हमेशा समाज को एकजुट करने, समरसता बढ़ाने और राष्ट्र निर्माण में एक सेतु की भूमिका निभाई है।

स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय सह-संयोजक सतीश ने ‘पंच परिवर्तन’ की अवधारणा को विस्तार से समझाया। उन्होंने इसके पांच मुख्य स्तंभों जैसे – सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन (पारिवारिक मूल्य), स्वदेशी जीवन शैली, नागरिक कर्तव्य पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ये पांच स्तंभ ही समग्र सामाजिक परिवर्तन के सशक्त माध्यम हैं और इन्हें अपनाकर ही हम एक सुदृढ़ राष्ट्र की कल्पना कर सकते हैं।

अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद (हरियाणा) के पूर्व अध्यक्ष जगरूप सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि अधिवक्ता केवल कानून के जानकार ही नहीं, बल्कि समाज के मार्गदर्शक भी हैं। उन्होंने नए कानूनों के प्रति जागरूकता फैलाने और न्याय वितरण प्रणाली को मजबूत करने में अधिवक्ताओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

विशेष अतिथि राजेश बैंसला की अनुपस्थिति में कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता प्रेम मित्तल ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। संगोष्ठी के अंत में उपस्थित सभी अधिवक्ताओं ने ‘पंच परिवर्तन’ के सिद्धांतों को अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में उतारने का सामूहिक संकल्प लिया।

इस अवसर पर संजय अरोड़ा, गोपाल दत्त, ऋषिपाल, मनोज शर्मा, कृपा राम, पूनम राघव, मीनाक्षी, डॉली, अन्नू, सबिता, ज्योति, गोविंद, वीरभान, अक्षत, दीपक बख्शी, यशपाल, महेंद्र, गंगाराम, अजीत सहित लगभग 255 अधिवक्ता एवं प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।

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