फरीदाबाद, 6 फरवरी।
डिजिटल गेम्स की लत बच्चों के लिए बन रही मानसिक परेशानी
फरीदाबाद
गाजियाबाद में कोरियन लव गेम के आदी तीन नाबालिग बहनों की घटना ने अभिभावकों को झकझोर कर रख दिया है। इसका असर फरीदाबाद में भी देखा जा रहा है, जहां बड़ी संख्या में बच्चे मोबाइल फोन और ऑनलाइन गेम्स के आदी होते जा रहे हैं। ग्रेटर फरीदाबाद स्थित एकॉर्ड अस्पताल की मनोचिकित्सक सिमरन मलिक के अनुसार डिजिटल गेम्स की लत बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है।
मलिक बताती हैं कि अस्पताल में हर महीने 5 से 6 बच्चे और किशोर मानसिक परेशानी के इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जिनमें से करीब दो बच्चे मोबाइल और गेम्स की अत्यधिक लत से जूझ रहे होते हैं। लगातार स्क्रीन पर समय बिताने से बच्चों में चिड़चिड़ापन, गुस्सा, अकेलापन और ध्यान की कमी जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। कई बच्चे पढ़ाई में पिछड़ने लगते हैं और नींद व खानपान का संतुलन भी बिगड़ जाता है।
उन्होंने बताया कि बच्चे अक्सर अपनी परेशानी शब्दों में नहीं कह पाते, बल्कि व्यवहार से संकेत देते हैं। अचानक ज्यादा चुप रहना, अकेले रहना पसंद करना, दोस्तों से दूरी बनाना और छोटी बातों पर गुस्सा होना मानसिक दबाव के लक्षण हो सकते हैं। डिजिटल गेम्स में हार-जीत बच्चों के मन पर गहरा असर डालती है। बार-बार हारने पर आत्मविश्वास कम होता है और वे खुद को दूसरों से कमतर समझने लगते हैं, जिससे वे धीरे-धीरे वास्तविक दुनिया से कटने लगते हैं।
डॉ. सिमरन मलिक का कहना है कि मोबाइल या गेम्स पूरी तरह बंद करना समाधान नहीं है, बल्कि समय-सीमा तय करना जरूरी है। अभिभावकों को बच्चों से रोज बातचीत करनी चाहिए, उनके साथ समय बिताना चाहिए और खेल-कूद व रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रेरित करना चाहिए। यदि बच्चे के व्यवहार में लगातार बदलाव दिखे तो देर न करें और किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें। जागरूकता ही इस समस्या से बचाव का सबसे मजबूत उपाय है।



