जे.सी.बोस विश्वविद्यालय में आरएसएस के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में ‘प्रमुख नागरिक संगोष्ठी’ संपन्न

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राष्ट्र साधना के 100 वर्षों की यात्रा और भविष्य के संकल्पों पर विस्तार से चर्चा एवं मंथन

शिक्षा और राष्ट्रवाद का संगम: प्रो.राजीव कुमार

अनुशासन और सेवा सर्वोपरि: डॉ. वीर कुमार भट्ट

शताब्दी संकल्प और सामाजिक भूमिका: रोशन लाल

परिवार और समाज की धुरी महिलाएं ही हैं : इन्दु राव

फरीदाबाद : 20 जनवरी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की श्रृंखला में ‘फरीदाबाद महानगर पूर्व’ द्वारा जे.सी.बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय वाईएमसीए में ‘प्रमुख नागरिक संगोष्ठी’ का आयोजन किया गया। शिक्षा, कला, साहित्य और लेखन क्षेत्र से जुड़े प्रबुद्ध नागरिकों की इस गोष्ठी में राष्ट्र साधना के 100 वर्षों की यात्रा और भविष्य के संकल्पों पर विस्तार से चर्चा के साथ मंथन हुआ।

विश्वविद्यालय के विवेकानंद सभागार में आयोजित ‘प्रमुख नागरिक गोष्ठी’ के मुख्य अतिथि कुलगुरु प्रो.राजीव कुमार ने अपने उद्बोधन में शिक्षा को राष्ट्र की आत्मा बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल जीविकोपार्जन का साधन नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और राष्ट्रीय चेतना को जाग्रत करने का माध्यम होनी चाहिए। विज्ञान और तकनीक के इस युग में हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहना अनिवार्य है। जब देश का युवा अपनी विरासत पर गर्व करेगा, तभी भारत वैश्विक पटल पर ‘विश्वगुरु’ के रूप में पुनः स्थापित होगा।

विशिष्ट अतिथि के रूप में सेवानिवृत्त मेजर जनरल डॉ.वीर कुमार भट्ट ने भारतीय सेना के गौरव और नागरिक कर्तव्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एक सशक्त राष्ट्र के लिए समाज में अनुशासन और ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना का होना आवश्यक है। संघ पिछले 100 वर्षों से समाज में इसी सेवा भाव और एकता को सींच रहा है। उन्होंने प्रबुद्ध वर्ग का आह्वान किया कि वे अपनी लेखनी और विचारों के माध्यम से समाज को संगठित एवं जागरूक करने का कार्य करें।

मुख्य वक्ता के रूप में आरएसएस के उत्तर क्षेत्र कार्यवाह रोशन लाल ने संघ की 100 वर्षों की विकास यात्रा को रेखांकित करते हुए कहा कि संघ का लक्ष्य केवल संगठन बढ़ाना नहीं, बल्कि समस्त समाज को संगठित करना है। आज विश्वभर में हिंदू दर्शन की स्वीकार्यता बढ़ रही है, जो हम सभी के मिलेजुले पुरुषार्थ का ही परिणाम है।

हरियाणा महिला समन्वय प्रमुख इन्दु राव ने अपने उद्बोधन में राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की सहभागिता पर बल दिया। उन्होंने कुटुंब प्रबोधन के विषय में क्रमवार एवं विस्तारपूर्वक उल्लेख करते बताया कि परिवार और समाज की धुरी महिलाएं ही हैं। शिक्षा और साहित्य के माध्यम से महिलाओं को राष्ट्र की मुख्यधारा में और अधिक सशक्त भूमिका निभानी होगी।

संगोष्ठी में विभाग संघचालक डॉ.अरविंद सूद, प्रांत सह कार्यवाह राकेश त्यागी, जय किशन और फरीदाबाद महानगर पूर्व संघचालक उमेश कुमार के नेतृत्व में किया गया। जिसमें विश्वविद्यालय और फरीदाबाद के सैकड़ों बुद्धिजीवियों, लेखकों और शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया। सामूहिक ‘जलपान’ के साथ गोष्ठी का सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यक्रम का संचालन प्रवीण और विशाल ने किया।

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