राष्ट्र निर्माण में मातृशक्ति की भूमिका अहम, संस्कारों से ही बनेगा समर्थ भारत: सिकंदर
फरीदाबाद : राष्ट्रीय सेविका समिति द्वारा सेक्टर-76 के वाई ब्लॉक पार्क संघ स्थान में भव्य ‘भारत माता पूजन’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में क्षेत्र की महिलाओं और युवतियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में देशभक्ति की भावना को प्रबल करना और राष्ट्र निर्माण में मातृशक्ति की भूमिका को रेखांकित करना था।
भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन और पुष्पार्चन के साथ हुआ। वातावरण में ‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ के उद्घोष गूंज उठे। समिति की सेविकाओं ने सामूहिक रूप से प्रार्थना और देशभक्ति गीतों का गायन किया, जिससे पूरा माहौल राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग गया।
मुख्य वक्ता सिकंदर ने अपने उद्बोधन में उपस्थित जनसमूह को गणतंत्र दिवस के वास्तविक अर्थ और नागरिकों के कर्तव्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस केवल एक सरकारी अवकाश या उत्सव का दिन नहीं है, बल्कि यह आत्मचिंतन का दिन है। हमें यह विचार करना होगा कि जिस संविधान और स्वतंत्रता के लिए हमारे पूर्वजों ने बलिदान दिया, क्या हम उसका सही अर्थों में सम्मान कर रहे हैं?
उन्होंने मातृशक्ति के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी राष्ट्र की उन्नति उसकी महिलाओं की स्थिति और विचारों पर निर्भर करती है। जीजाबाई ने शिवाजी को गढ़ा था, तब जाकर स्वराज्य की स्थापना हुई थी। आज भी हर घर में एक जीजाबाई की आवश्यकता है जो अपने बच्चों में राष्ट्र प्रेम, नैतिकता और सनातन संस्कृति के संस्कार भर सके। परिवार व्यवस्था को सुदृढ़ रखना और बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़े रखना ही राष्ट्र की सबसे बड़ी सेवा है।
उन्होंने आगे कहा कि भारत को ‘विश्वगुरु’ बनाने के लिए हमें अपने ‘स्व’ को जागृत करना होगा। विदेशी मानसिकता का त्याग कर स्वदेशी विचार और व्यवहार को अपनाना ही सच्ची स्वतंत्रता है। राष्ट्र के प्रति समर्पण का संकल्प बौद्धिक सत्र के अंत में उपस्थित सभी मातृशक्ति ने राष्ट्र की एकता और अखंडता को बनाए रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान और प्रसाद वितरण के साथ हुआ। इस अवसर पर समिति के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और स्थानीय गणमान्य नागरिक भी उपस्थित रहे। सेक्टर-76 का पूरा वातावरण देशभक्ति के उत्साह से सराबोर नजर आया।



