प्रसिद्ध लोक गायक रमेश खवडिय़ा की रागनी ने बांधा समां, अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियों ने भी मोहा मन
Faridabad : 9 फरवरी। 39 वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला-2026 के अंतर्गत मुख्य चौपाल पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में दर्शकों को हरियाणवी लोक संगीत की शानदार प्रस्तुति देखने को मिली। प्रसिद्ध हरियाणवी लोक गायक रमेश खवडिय़ा ने अपनी पूरी टीम के साथ रागनी गायन की मनमोहक प्रस्तुति देकर उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
रमेश खवडिय़ा द्वारा प्रस्तुत रागनियों में वीर नायकों, शौर्य, बलिदान और लोक परंपराओं की जीवंत झलक देखने को मिली। उनकी गायकी में हरियाणा की लोक संस्कृति, ऐतिहासिक गाथाएं और देशभक्ति की भावना स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई। पारंपरिक शैली में प्रस्तुत रागनियों ने दर्शकों को हरियाणा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ दिया। इस दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्रों की संगत ने प्रस्तुति को और अधिक प्रभावशाली बना दिया। लोक धुनों और सशक्त गायन से मुख्य चौपाल तालियों की गूंज से भर उठी, वहीं बड़ी संख्या में मौजूद दर्शकों ने कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया और कलाकारों की जमकर सराहना की।
रमेश खवडिय़ा की इस प्रस्तुति ने यह सिद्ध कर दिया कि रागनी केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि हरियाणा की लोक चेतना, इतिहास और सांस्कृतिक पहचान की सशक्त अभिव्यक्ति है। उनकी टीम के साथ दी गई यह प्रस्तुति सूरजकुंड मेले की सांस्कृतिक गरिमा को नई ऊंचाइयों तक ले गई।
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दिन के समय अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियों ने भी जीता दिल*
मेले के दौरान दिन के समय मुख्य चौपाल पर विभिन्न विदेशी एवं भारतीय सांस्कृतिक दलों ने अपनी आकर्षक प्रस्तुतियां दीं, जिन्होंने बड़ी संख्या में उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया। इस्वातिनी, सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक, केप वर्डे, सेनेगल, मिस्र, कांगो, सेशेल्स, नाइजीरिया, कजाखस्तान, गाम्बिया, जिबूती, इक्वेटोरियल गिनी और इराक सहित कई देशों के कलाकारों ने अपने-अपने देश की लोक संस्कृति, संगीत और नृत्य के माध्यम से सांस्कृतिक रंग बिखेरे।
इसके साथ ही हरियाणा एवं अन्य भारतीय समूहों की पारंपरिक प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों को खूब आनंदित किया। दिन में आयोजित इन कार्यक्रमों के दौरान मुख्य चौपाल पर दर्शकों की अच्छी-खासी भीड़ उमड़ी और हर प्रस्तुति को जोरदार तालियां मिलीं।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां बनी यादगार*
कार्यक्रम के अंत में दर्शकों ने कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए लंबे समय तक तालियां बजाईं और एक से बढक़र एक प्रस्तुतियों की मांग की। यह सांस्कृतिक कार्यक्रम सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेले की यादगार प्रस्तुतियों में शामिल हो गई।



