FARIDABAD(ANURAG SHARMA) अगर आप सोचते हैं कि इतिहास सिर्फ किताबों में दर्ज होता है, तो आपको मशहूर मुद्राशास्त्री (Numismatist) सतीश सिंघल से मिलना चाहिए। सतीश सिंघल ने अपने जुनून और कड़ी मेहनत से भारत के गौरवशाली इतिहास, संस्कृति और अध्यात्म को सिक्कों के रूप में एक ऐसी नायाब लाइब्रेरी में समेट दिया है, जिसे देखना किसी अजूबे से कम नहीं है। उनके पास भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारत सरकार द्वारा समय-समय पर जारी किए गए बेहद दुर्लभ और ऐतिहासिक स्मारकीय सिक्कों (Commemorative Coins) का एक ऐसा बेजोड़ संग्रह है, जो देश के बड़े-बड़े म्यूजियम को भी टक्कर दे सकता है।
सतीश सिंघल के इस चमचमाते खजाने में कुछ बेहद अनमोल और ऐतिहासिक सिक्के शामिल हैं, जो हर भारतवासी का सीना गर्व से चौड़ा कर देंगे:
- तंजौर मंदिर का हजार साला वैभव (₹1000 का सिक्का): इनके संग्रह की सबसे बड़ी शान बृहदेश्वर मंदिर (तंजौर) के 1000 वर्ष पूरे होने पर जारी किया गया 1000 रुपये का चांदी का ऐतिहासिक सिक्का है। यह सिक्का कला और भारतीय इतिहास का एक बेजोड़ दस्तावेज है।
- अध्यात्म और संतों को समर्पित सम्मान: सिंघल जी के पास श्री कृष्ण चैतन्य महाप्रभु के वृंदावन आगमन की 500वीं जयंती पर जारी ₹500 का सिक्का, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के 350वें प्रकाश उत्सव पर जारी ₹350 का सिक्का और श्रील ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद की 125वीं जयंती पर जारी ₹125 का सिक्का मौजूद है, जो देश की आध्यात्मिक विरासत को दर्शाता है।
- क्रांति और इतिहास की गवाही: 1857 के महान स्वतंत्रता सेनानी तात्या टोपे की 200वीं जयंती पर जारी ₹200 का दुर्लभ सिक्का भी इनके कलेक्शन की शोभा बढ़ा रहा है।
- विंटेज और पुराने सुनहरे दौर की यादें: इस खजाने में सिर्फ आधुनिक सिक्के ही नहीं, बल्कि 1974 का ‘नियोजित परिवार: सब के लिए अनाज’ थीम वाला ₹10 का ऐतिहासिक सिक्का और 1973 का एफएओ (FAO) ‘अधिक अन्न उगाओ’ थीम पर आधारित ₹20 का विंटेज सिक्का भी शामिल है।
सतीश सिंघल जी का यह संग्रह सिर्फ सिक्कों का जमावड़ा नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए भारत की सभ्यता, संस्कृति और विकास यात्रा को संजोकर रखने का एक महान और सराहनीय प्रयास है। इतिहास को इस अनूठे अंदाज में जिंदा रखने के लिए सतीश सिंघल जी की जितनी तारीफ की जाए, वो कम है। उनका यह प्रयास वाकई हर देशभक्त और इतिहास प्रेमी को सलाम करने पर मजबूर करता है!



