सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में तुर्की की कला का जादू
-जगमगाते हैंडमेड लैंप और बारीक सिरेमिक बने आकर्षण का केंद्र
Faridabad : 1 फरवरी। सूरजकुंड की ऐतिहासिक वादियों में आयोजित हो रहे 39वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले में तुर्की के शिल्पकारों ने अपनी पारंपरिक कला और हुनर से पर्यटकों का दिल जीत लिया है। मेले के अंतर्राष्ट्रीय पवेलियन में तुर्की के स्टॉल पर सजे रंग-बिरंगे हैंडमेड मोज़ेक लैंप और बारीक नक्काशी वाले सिरेमिक उत्पाद मुख्य आकर्षणों में से एक बनकर उभरे हैं। मेले में आने वाले पर्यटक तुर्की की इस कला को करीब से देख सकते हैं और शिल्पकारों से उनके हुनर के बारे में संवाद भी कर रहे है।
तुर्की से आए शिल्पकार हाकन ने बताया कि ये लैंप पूरी तरह से हाथों से तैयार किए गए हैं, जिनमें छोटे-छोटे रंगीन कांच के टुकड़ों को जोड़कर आकर्षक पैटर्न बनाए जाते हैं। ये लैंप न केवल रोशनी प्रदान करते हैं, बल्कि तुर्की की सदियों पुरानी ओटोमन साम्राज्य की संस्कृति की झलक भी पेश करते हैं। इसके साथ ही, तुर्की का प्रसिद्ध सिरेमिक वर्क (मिट्टी के बर्तन और सजावटी सामान) अपनी सूक्ष्म लिखावट और चटख रंगों के लिए जाना जाता है। यहां प्लेट्स, कटोरे और फूलदानों पर इजनिक शैली की चित्रकारी देखी जा सकती है, जो घर की सजावट के शौकीनों के लिए पहली पसंद बनी हुई है।
सूरजकुंड मेला लोकल टू ग्लोबल की दिशा में एक बड़ा कदम
इस वर्ष मेले की थीम लोकल टू ग्लोबल – आत्मनिर्भर भारत की पहचान रखी गई है। तुर्की जैसे देशों की भागीदारी इस वैश्विक मंच को और भी समृद्ध बनाती है। हरियाणा पर्यटन और सूरजकुंड मेला प्राधिकरण के सहयोग से आयोजित यह मेला न केवल भारतीय शिल्पकारों को मंच प्रदान कर रहा है, बल्कि विदेशी कलाकारों के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक बड़ा जरिया भी बन गया है।



