के. एल. महता दयानन्द महिला महाविद्यालय, सभागार, एन. एच. 3, फरीदाबाद (हरियाणा)
के. एल. महता दयानन्द महिला महाविद्यालय, फरीदाबाद में 28 जनवरी 2026 को संस्थापक प्रधान महान विभूति महात्मा कन्हैयालाल महता जी तथा डॉ. विमल महता जी की पुण्यतिथि के अवसर पर प्रेरणा दिवस का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं गरिमामय वातावरण में किया गया। इस पावन अवसर पर महर्षि दयानन्द शिक्षण संस्थान एवं आर्य समाज, नेहरू ग्राउंड, फरीदाबाद के संयुक्त तत्वावधान में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में अनेक विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनमें संस्थान के अध्यक्ष डॉ आनंद मेहता जी, डॉ अनीता कांत (उपाध्यक्ष) श्रीमती शुभ मेहता( सेल्फ फाइनेंस डायरेक्टर) महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ मीनू दुआ व सम्मानित श्रीमती रेनू भाटिया( हरियाणा राज्य महिला आयोग अध्यक्ष)आचार्य नरेंद्र मैत्रेय जी, श्री यादवेंद्र शास्त्री जी, आचार्य देवव्रत जी, आचार्य ऋषिपाल जी, डॉ. ओम प्रकाश योगाचार्य जी, श्री जितेंद्र नायल जी उपस्थित रहे .
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः गायत्री महायज्ञ की पूर्णाहुति के साथ हुआ । इसके पश्चात सरस्वती वंदना , भजन एवं श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित हुआ जिसमें श्रीमती प्रतिभा सिंह, अभिलाषा मिश्रा एवं छात्राओं द्वारा सुमधुर भजनों की प्रस्तुति दी गई। डॉ. ओम प्रकाश योगाचार्य एवं फरीदाबाद के गणमान्य व्यक्तियों द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की गई। श्री ओम प्रकाश योगाचार्य जी ने संस्थापक कन्हैया लाल मेहता व विमल मेहता जी के महान कार्यों का गुणगान किया और शारीरिक, मानसिक, आत्मिक शांति के लिए योग व ध्यान पर बल दिया.
मुख्य वक्ता के रूप में आर्य जगत के प्रसिद्ध भजनोपदेशक पं. दिनेश पथिक जी ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन से सभी को आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों एवं सेवा भाव का संदेश दिया। उनके ओजस्वी एवं भावपूर्ण प्रवचन ने श्रोताओं को गहन रूप से प्रभावित किया। दिनेश जी व उनके पुत्र विवेक पथिक जी भजन के द्वारा दिव्य आत्माओं को नमन किया.
श्रीमती रेनू भाटिया जी ने अपने भाषण में छात्राओं की शिक्षा पर जोर देते हुए उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया.
इस पुण्यतिथि के अवसर पर पुस्तकालय के नाम को विदुषी डॉ विमल मेहता जी के नाम समर्पित किया गया. पुस्तकालय को नया नाम डॉ विमल ज्ञान सरोवर दिया गया. डॉआनंद मेहता जी ने अपने भाषण में विद्यालयो,महाविद्यालय के विकास में समस्त लोगों की एकजुटता को इसका कारण बताया.
कार्यक्रम का समापन स्नेहिल वातावरण में अल्पाहार (लंगर) व्यवस्था के साथ हुआ। संपूर्ण आयोजन अत्यंत सुव्यवस्थित, अनुशासित एवं सफल रहा। इस अवसर पर उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं आगंतुकों ने संस्थापक महान विभूतियों के आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।



