फरीदाबाद में पहली बार

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फरीदाबाद में पहली बार

फोर्टिस एस्कॉर्ट्स फरीदाबाद ने डुएल चैंबर लीडलैस पेसमेकर की मदद से किया दुर्लभ पेसमेकर इंफेक्शन का सफल उपचार; 58-वर्षीय मरीज़ का जीवनघातक सेप्सिस से किया बचाव

डुएल चैंबर लीडलैस पेसमेकर हृदय के दोनों चैंबर्स को नियंत्रित करने में सक्षम एक अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी है, यह हृदय की प्राकृतिक गति की काफी हद तक नकल कर करती है

फरीदाबाद, 12 फरवरी, 2026: फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, फरीदाबाद के डॉक्टरों ने हृदय से जुड़ी एक दुर्लभ और संभावित रूप से जानलेवा जटिलता का सफलतापूर्वक इलाज करते हुए 58 वर्षीय पुरुष मरीज की जान बचाई। मरीज को पेसमेकर प्रत्यारोपण के छह महीने बाद ‘पेसमेकर पॉकेट इंफेक्शन’ हो गया था। इस प्रकार के मामले आमतौर से दुर्लभ होते हैं और 50 में से एक प्रत्यारोपण (इंप्लांट) में ही देखा गया है। डॉ संजय कुमार, सीनियर डायरेक्टर, कार्डियोलॉजी, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, फरीदाबाद के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने तत्काल इस संक्रमित यंत्र को हटाकर एडवांस लीडलैस डुएल-चैंबर पेसमेकर लगाकर मरीज को जीवनघाती जटिलताओं से बचाकर उनके दीर्घकालिक हार्ट फंक्शन को सुनिश्चित करने में मदद की है।

मरीज को कई वर्षों से बार-बार अकारण बेहोशी के दौरे पड़ रहे थे, जिसके चलते छह महीने पहले पेसमेकर लगाया गया था। लेकिन, पेसमेकर लगने के छह महीने बाद ही, पेसमेकर पॉकेट की जगह पर मवाद और संक्रमण गंभीर चिंता का कारण बन गए थे। मरीज की सी. टी. स्कैनस्कैन, अल्ट्रासाउंड, पस डिस्चार्ज और ब्लड कल्चर जांच से कार्डियाक इंप्लांटेबल इलैक्ट्रॉनिक डिवाइस (सीआईईडी) इंफेक्शन की पुष्टि हुई। हालांकि पेसमेकर से जुड़ा संक्रमण आमतौर पर पहले महीने के भीतर सामने आ जाता है और इसका संबंध अक्सर त्वचा के नीचे मौजूद पेसिंग वायर से होता है, लेकिन यह मामला इसलिए दुर्लभ था क्योंकि मरीज को नया, वायर-फ्री पेसमेकर लगाया गया था। ऐसे में संक्रमण की संभावना बेहद कम थी और इसका इलाज भी अधिक जटिल हो गया था। पारंपरिक रूप से, ऐसे मामलों में उपचार के लिए पेसमेकर को पूरी तरह से निकालना होता है, और इसके बाद करीब दो सप्ताह तक अस्थायी पेसिंग की जाती है, ताकि घाव को भरने का मौका मिल सके और तब दूसरी तरफ तारों वाला पेसमेकर लगाया जाता है, जो मरीजों को लंबे समय तक चलने-फिरने में असमर्थ कर देता है और उन्हें बार-बार होने वाले संक्रमणों के गंभीर खतरे में डाल देता है। लेकिन, कार्डियोलॉजी टीम ने अधिक एडवांस और मरीज-केंद्रित विकल्प को चुना। उनके संक्रमित पेसमेकर को सुरक्षित तरीके से हटाकर उसके स्थान पर डुएल-चैंबर लीडलैस पेसमेकर लगाया था – यह नेक्स्ट-जेन टेक्नोलॉजी है जो हृदय के दोनों चैंबर्स को नियंत्रित रखने में सक्षम है, और हृदय की प्राकृतिक गति की भी काफी हद तक नकल करती है। यह मिनीमैली इन्वेसिव प्रक्रिया लोकल एनेस्थीसिया के तहत की गई, जिसे मात्र 1 से 1.5 घंटे में पूरा कर लिया गया। इसका एक बड़ा फायदा यह हुआ कि मरीज को चेस्ट पॉकेट या पेसिंग वायर लगाने की जरूरत नहीं रह गई, और इस तरह से भविष्य में इंफेक्शन का खतरा भी कम हो गया।

इस मामले की जानकारी देते हुए, डॉ संजय कुमार, सीनियर डायरेक्टर, कार्डियोलॉजी, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, फरीदाबाद ने कहा, “यदि पेसमेकर इंफेक्शन को तत्काल दूर नहीं किया जाए तो यह काफी गंभीर खतरा बन सकता है। पुराने लीडलैस पेसमेकर्स हृदय के केवल एक चैंबर को ही नियंत्रित कर सकते थे, और इस वजह से अक्सर मरीज को सांस लेने में तकलीफ होती थी और धीरे-धीरे हृदय भी कमजोर होता जाता था। लेकिन नया डुएल-चैंबर सिस्टम यह सुनिश्चित करता है कि हृदय काफी हद तक सामान्य तरीके से काम करता रहे, जिससे हृदय की ताकत को बरकरार रखा जाता है और मरीज के जीवन की गुणवत्ता में भी काफी हद तक सुधार होता है। इस प्रक्रिया के बाद, मरीज ने काफी हद तक स्वास्थ्यलाभ कर लिया है और उनका हृदय भी ठीक प्रकार से काम कर रहा है तथा दोबारा इंफेक्शन भी नहीं हुआ है। उन्हें स्थिर अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और उनके हृदय की कार्यप्रणाली को भी सुरक्षित (LVEF 55–60%) रखा गया है। इस मामले ने यह स्पष्ट रूप से रेखांकित किया है कि एडवांस लीडलैस पेसिंग टेक्नोलॉजी से न सिर्फ मरीजों का जीवन बचाया जा सकता है बल्कि उन्हें लंबे समय तक अस्पताल में रुकने, गतिहीन रहने, और बार-बार इंफेक्शन का शिकार बनने जैसी मजबूरियों से भी नहीं गुजरना पड़ता।”

डॉ अमित मदान, सीनियर कंसल्टेंट, कार्डियोलॉजी, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, फरीदाबाद ने कहा, “हालांकि कार्डियाक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस (सीआईईडी) इंफेक्शन, असामान्य होते हैं, लेकिन यदि समय पर उचित तरीके से इनका उपचार न किया जाए तो ये गंभीर जटिताओं का कारण बन सकते हैं। इस मामले में, शुरूआत में ही डायग्नॉसिस, और तत्काल डिवाइस को हटाने, तथा एडवांस लीडलैस पेसिंग के लिए तुरंत तैयारी करने से सेप्सिस और हृदय को आगे परेशानी से बचाया जा सका। डुएल-चैंबर लीडलैस पेसमेकर टेक्नोलॉजी ने इस प्रकार के जटिल मामलों से निपटने के तौर-तरीकों को काफी हद तक बदल डाला है।”

डॉ अभिषेक शर्मा, फेसिलिटी डायरेक्टर, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, फरीदाबाद ने कहा, “इस मामले ने अत्याधुनिक और मरीज-केंद्रित कार्डियाक केयर प्रदान करने की फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल फरीदाबाद की प्रतिबद्धता दर्शायी है। इस प्रकार के दुर्लभ और हाइ-रिस्क पेसमेकर इंफेक्शन का एडवांस डुएल-चैंबर लीडलैस टेक्नोलॉजी की मदद से उपचार कर हमने अपनी क्लीनिकल दक्षताओं, इंफ्रास्ट्रक्चर और मल्टीडिसीप्लीनरी टीमवर्क को एक बार फिर साबित कर दिखाया है। हमारा जोर केवल जटिल कंडीशंस के उपचार पर ही नहीं होता, बल्कि हम मरीजों को अधिक सुरक्षित, अधिक सेहतमंद और अधिक एक्टिव लाइफस्टाइल के लिए भी दोबारा तैयार करते हैं।”

फोर्टिस हेल्‍थकेयर लिमिटेड के बारे में
फोर्टिस हेल्‍थकेयर लिमिटेड भारत में अग्रणी एकीकृत स्‍वास्‍थ्‍य सेवा प्रदाता है। कंपनी के हेल्थकेयर वर्टिकल्स में मुख्यतः अस्पताल, डायग्नॉस्टिक्स तथा डे केयर सेवाएं शामिल हैं। वर्तमान में, कंपनी देशभर के 12 राज्यों एवं संघ शासित प्रदेशों में कुल 36 हेल्थकेयर सुविधाओं (जिनमें जेवी और ओ एंड एम शामिल हैं) का संचालन करती है। कंपनी के नेटवर्क में 6,000 से अधिक ऑपरेशनल बेड (ओ एंड एम समेत) तथा 400 डायग्नॉस्टिक्स लैब्स शामिल हैं

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