फोर्टिस एस्कॉर्ट्स फरीदाबाद ने किया 33-वर्षीय महिला की प्रसव के दौरान लगी दुर्लभ चोट का सफल उपचार, पिछले 5 वर्षों से इस चोट की वजह से तकलीफ से गुजर रही महिला की लाइफ क्वालिटी की बहाल

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इस प्रकार का पेरिनियल टियर प्रसव के 0.05% से 0.2% मामलों में ही देखा गया है

फरीदाबाद, 07 मई, 2026: फोर्टिस एस्कॉर्ट्स फरीदाबाद के डॉक्टरों ने दुर्लभ और जटिल मामले में, बिहार की 33-वर्षीय महिला का सफल उपचार कर उनकी जीवन की गुणवत्ता लौटायी है। मरीज पिछले कुछ वर्षों से काफी दर्द और मल असंयम (बाउअल नियंत्रण न रहना) तथा सामाजिक अलगाव की स्थति से गुजर रही थी जो कि 5 साल पहले प्रसव के दौरान लगी चोट के कारण पैदा हुई थी।

प्रसव के दौरान उक्त महिला के पेरिनियम, जो कि योनि और गुदा मुख के बीच का हिस्सा होता है, को चोट पहुंची थी और यह फट गया था। प्रसव के दौरान इस प्रकार का पेरिनियम टियर प्रसव के समय आमतौर से तब होता है जबकि शिशु योनि द्वार से बाहर आने के लिए फैलाव के लिए जोर लगाता है। हालांकि छोटे आकार का टियर होने पर उसे आसानी से रिपेयर किया जा सकता है, लेकिन इस मामले में, ऊतक गुदा मार्ग तक काफी अधिक फट चुके थे जिसके कारण मरीज का मल-त्याग पर संयम नहीं रह गया था।

इस मामले में उपचार के लिए, डॉ अनीता सोनी और डॉ इशा वधावन की देखरेख में मरीज की सर्जरी की गई जो करीब 1.5 घंटे चली। यह प्रक्रिया सफल रही और स्थिर अवस्था में 2 दिनों के बाद मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

मरीज को 5 साल पहले एक कठिन प्रसव के दौरान पेरिनियम टियर से गुजरना पड़ा था, यह उनकी दूसरी डिलीवरी का मामला था। टियर इतना बड़े आकार का था कि योनि मुख से होते हुए आसपास के ऊतकों और मांसपेशियों को चीरते हुए मलाशय (रेक्टम) और गुदा की परतों तक पहुंच गया, जिसकी वजह से योनि और गुदा नलिकाओं के बीच असामान्य मार्ग बन गया था। यह एक दुर्लभ और गंभीर किस्म की जटिलता थी जिसके कारण मरीज मल असंयम से गुजर रही थी, और मल त्याग तथा गैस निकलने पर उनका कोई नियंत्रण नहीं रह गया था। ऐसे में पर्सनल हाइजीन की समस्या बेहद चुनौतीपूर्ण थी, जिसके कारण उनके शारीरिक और मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा था। हालांकि दूसरी डिलीवरी के समय, शुरुआत में सर्जरी से पेरिनियम टियर को रिपेयर करने का प्रयास किया गया था लेकिन यह असफल रहा, और धीरे-धीरे उनकी कंडीशन लगातार बिगड़ती रही। अपने होमटाउन में इस समस्या का कोई कारगर उपचार नहीं मिलने के बाद, उक्त महिला ने आखिरकार फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, फरीदाबाद से संपर्क किया।

अस्पताल में जांच के बाद, डॉक्टरों ने पाया कि वह काफी समय से पेरिनियल टियर से जूझ रही थी, यह करीब 6-7 से.मी. आकार का था और इसकी वजह से गुदा समेत आसपास की मांसपेशियों को काफी नुकसान पहुंच चुका था। विस्तृत क्लीनिकल परीक्षणों और ऑपरेशन पूर्व जांच के बाद, मेडिकल टीम ने उनकी जटिल सर्जिकल रिपेयर को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

यह जटिल और नाजुक प्रक्रिया लगभग 1.5 घंटे चली, जिसमें गुदा भीतरी परत को बारीकी से रीकंस्ट्रक्ट किया गया। साथ ही, मल त्याग में नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण स्फिंक्टर मांसपेशियों (sphincter muscles) तथा योनि एवं गुदा के आसपास के ऊतकों की भी मरम्मत की गई। पुरानी चोट की वजह से सर्जरी के दौरान जटिलताएं बढ़ गई थीं। लेकिन, मेडिकल टीम ने काफी बारीकी के साथ सटीक तरीके से इन क्षतिग्रस्त मांसपेशियों एवं ऊतकों को रिपेयर किया, और मरीज की दीर्घकालिक रिकवरी सुनिश्चित की। सर्जरी के दो दिन बाद ही मरीज को स्थिर अवस्था में अस्पताल से छुट्टी भी मिल गई।

इस मामले की विस्तार से जानकारी देते हुए, डॉ अनीता सोनी, एडिशनल डायरेक्टर, ऑब्सटेट्रिक्स एवं गाइनीकोलॉजी (प्रसूति एवं स्त्री रोग), फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, फरीदाबाद ने कहा, “इस मामले ने समय पर डायग्नॉसिस और प्रसव संबंधी चोटों के समुचित उपचार/प्रबंधन के महत्व को रेखांकित किया है। हालांकि इस प्रकार के गंभीर पेरिनियल टियर दुर्लभ होते हैं, लेकिन यदि समय पर इलाज न किया जाए तो प्रभावित महिला की दीर्घकालिक शारीरिक, भावनात्मक सेहत और समाज में आत्मविश्वास की दृष्टि से इसका गहरा असर पड़ता है। इस बारे में अधिक जागरूकता, प्रसव के दौरान समुचित दक्षता और पर समय पर मेडिकल सहायता इन जटिलताओं से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।”

डॉ इशा वधावन, कंसल्टेंट, ऑब्सटेट्रिक्स एवं गाइनीकोलॉजी (प्रसूति एवं स्त्री रोग), फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, फरीदाबाद ने कहा, “इस तरह के पुराने मामलों में, पुरानी चोटों और ऊतक संरचनाओं को हुई क्षति की वजह से सर्जरी अधिक जटिल प्रक्रिया बन जाती है। मल-त्याग पर नियंत्रण को वापस लाने के लिए परत-दर-परत रीकंस्ट्रक्शन से मरीज की जीवन गुणवत्ता को लौटाया जाता है। उचित तरीके से सर्जरी और उसके बाद देखभाल से मरीजों को लंबे समय से जारी परेशानी से मुक्ति मिलती है। उक्त मरीज अब मेडिकल टीम के साथ नियमित रूप से फौलो-अप करवा रही हैं और उनके घाव धीरे-धीरे ठीक से भरने लगे हैं, वह शारीरिक पीड़ा से भी मुक्त हो गई हैं और मल-त्याग संयम लौटने के साथ ही उनका भरोसा भी वापस आ चुका है। वह अस्पताल की पूरी मेडिकल टीम और उनके दयाभाव के प्रति आभारी हैं।”

डॉ अभिषेक शर्मा, फैसिलिटी डायरेक्टर, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, फरीदाबाद ने कहा, “इस प्रकार के मामले समय पर डायग्नॉसिस और प्रसवोपरांत समुचित देखभाल के महत्व को उजागर करते हैं। किसी भी महिला को इस प्रकार की परेशानी से चुपचाप नहीं गुजरते रहना चाहिए। सही वक्त पर सही क्लीनिकल देखभाल मिलने से इस तरह के पुराने मामलों में भी समाधान संभव है, और हमारे अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने सटीक तरीके से सर्जरी कर इस बात को फिर साबित कर दिखाया है।”

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