आज 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले में गूंजेगी भक्ति रस की स्वर-लहरियां

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पार्श्व गायक एवं रियलिटी शो विजेता हेमंत बृजवासी की मधुर आवाज से सजेगी सूरजकुंड की मुख्य चौपाल

Faridabad : 1 फरवरी। सूरजकुंड मेला केवल शिल्प और हस्तकला का उत्सव ही नहीं, बल्कि भारत की लोक-संस्कृति, संगीत और परंपराओं का जीवंत मंच भी है। इस अंतरराष्ट्रीय मेले में देश-विदेश से आए कलाकार, शिल्पकार और पर्यटक भारतीय संस्कृति के विविध रंगों को करीब से अनुभव कर रहे हैं। मुख्य चौपाल पर आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम मेले का विशेष आकर्षण होते हैं, जहां हर दिन अलग-अलग विधाओं के कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करते हैं। ऐसा ही नजारा विश्व प्रसिद्ध 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले में सोमवार 2 फरवरी को सायं 6:30 बजे से सांस्कृतिक संध्या में देखने को मिलेगा। मेला परिसर की मुख्य चौपाल पर भक्ति, संस्कृति और सुरों का अद्भुत संगम दिखाई देगा। सूरजकुंड मेले की मुख्य चौपाल पर पार्श्व गायक एवं रियलटी शो विजेता बृजभूमि के सुप्रसिद्ध भजन गायक हेमंत बृजवासी अपनी मधुर आवाज से भक्ति रस की स्वर-लहरियां बिखेरेंगे। उनके भजनों से पूरा सूरजकुंड परिसर आध्यात्मिक वातावरण में सराबोर हो जाएगा।

हेमंत बृजवासी, जो अपनी सादगीपूर्ण गायकी और गहरे भावों से श्रोताओं के हृदय को छू लेने के लिए जाने जाते हैं, आज सूरजकुंड मेला में भक्ति संगीत के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत करेंगे। उनके कार्यक्रम में कृष्ण भक्ति सहित अन्य लोकप्रिय भजन शामिल होंगे, जिन पर श्रोता स्वत: ही भाव-विभोर होकर झूमने को विवश हो जाएंगे। हेमंत बृजवासी का यह भक्ति संध्या कार्यक्रम मेले के प्रमुख आकर्षणों में से एक रहेगा। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और संगीत प्रेमियों के पहुंचने की संभावना है, जिसके चलते सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन ने भी विशेष इंतजाम किए हैं ताकि दर्शक बिना किसी परेशानी के कार्यक्रम का आनंद उठा सकें।

सूरजकुंड मेले में आए पर्यटक दिनभर शिल्पकारों द्वारा बनाए गए हस्तनिर्मित उत्पादों, हथकरघा वस्त्रों और पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लेने के बाद शाम को इस भक्ति संध्या में शामिल होकर एक अलग ही शांति और ऊर्जा का अनुभव करेंगे। हेमंत बृजवासी की गायकी न केवल मनोरंजन करेगी, बल्कि भारतीय भक्ति परंपरा की गहराई से भी लोगों को जोड़ेगी। 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले की यह भक्ति रस से सजी शाम श्रद्धा, संगीत और संस्कृति का अविस्मरणीय संगम सिद्ध होगी।

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